सरिस्का से निकले बाघ ने तुलसीवाला गांव में मचाया हड़कंप, 10 घंटे के रेस्क्यू के बाद सुरक्षित पकड़ा गया

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A tiger that strayed from Sariska caused a stir in Tulsiwala village

A tiger that strayed from Sariska caused a stir in Tulsiwala village, कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नारायणपुर क्षेत्र का तुलसीवाला गांव आज पूरे दिन सुर्खियों में रहा. सरिस्का टाइगर रिजर्व से निकला एक टाइगर गांव के पुराने रास्ते के पास झाड़ियों में दिखाई दिया. सुबह शुरू हुआ यह घटनाक्रम शाम तक हाई वोल्टेज ड्रामे में बदल गया. टाइगर के हमले में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. वन विभाग और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई. विभाग के वाहनों में तोड़फोड़ की गई, और नारायणपुर-कुशालगढ़ हाईवे जाम कर दिया गया.  

10 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन 

हालात बिगड़ते देख जिले भर की पुलिस मौके पर पहुंची. करीब 10 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद वन विभाग ने टाइगर को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में वन विभाग के कई कर्मचारी भी घायल हो गए, और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखने का ऐलान किया है. 

झाड़ियों में छिपा था टाइगर

बुधवार सुबह करीब 9 बजे नारायणपुर क्षेत्र के तुलसीवाला गांव के ग्रामीण अपने दैनिक कार्यों के लिए निकले हुए थे. इसी दौरान गांव के पुराने रास्ते के पास झाड़ियों में एक बड़े जंगली जानवर की हलचल दिखाई दी. पहले लोगों को शक हुआ कि कोई तेंदुआ या अन्य वन्यजीव हो सकता है. ग्रामीणों ने दूर से निगरानी की और पुष्टि करने के लिए सुरक्षित दूरी से पत्थर फेंका.  हरकत होते ही स्पष्ट हो गया कि झाड़ियों में टाइगर मौजूद है. 

वन विभाग को दी सूचना 

टाइगर दिखाई देने की खबर कुछ ही मिनटों में पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में फैल गई. बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे.  देखते ही देखते घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई.सूचना वन विभाग को दी गई, जिसके बाद फारेस्टर मनोज नागा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को टाइगर से दूरी बनाए रखने तथा भीड़ नहीं लगाने की अपील की. 

टाइगर की गतिविधियों पर नजर रखी

वन विभाग ने प्रारंभिक तौर पर इलाके की घेराबंदी शुरू की और टाइगर की गतिविधियों पर नजर रखी. अधिकारियों के अनुसार, यह बाघ पिछले कई दिनों से जंगल से बाहर विभिन्न इलाकों में घूम रहा था और नई टेरिटरी की तलाश में अजबगढ़ रेंज से राजगढ़ रेंज की ओर बढ़ रहा था. शुरुआत में माना जा रहा था कि यह सरिस्का की टाइग्रेस ST-17 का शावक हो सकता है, जो करीब एक महीने से अपने क्षेत्र से गायब बताया जा रहा था. हालांकि, बाद में फोरेस्टर मनोज नागा ने बताया कि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि संभावना है कि यह ST-12 बाघिन का दूसरा शावक हो, लेकिन अंतिम पुष्टि पहचान के बाद ही की जाएगी. 

भीड़ बनी सबसे बड़ी चुनौती

वन विभाग ने रेस्क्यू की तैयारी शुरू कर दी, लेकिन सबसे बड़ी समस्या घटनास्थल पर लगातार बढ़ती भीड़ रही. बड़ी संख्या में लोग मोबाइल फोन से वीडियो बनाने और टाइगर को करीब से देखने के लिए झाड़ियों के पास तक पहुंच गए. इससे टाइगर लगातार तनाव में आ गया और रेस्क्यू टीम के लिए सुरक्षित तरीके से ट्रेंकुलाइज करना मुश्किल हो गया. वन विभाग की टीम बार-बार लोगों से पीछे हटने की अपील करती रही, लेकिन भीड़ पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी. खुले क्षेत्र में मौजूद टाइगर की हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा रही थी. 

युवक पर हमला, हालात बिगड़े

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अचानक टाइगर ने एक युवक पर हमला कर दिया. हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे बचाया और तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए रेफर कर दिया गया. युवक के घायल होने की खबर फैलते ही ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा.  लोगों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया और मौके पर हंगामा शुरू हो गया. 

वन विभाग और ग्रामीणों में झड़प

स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब गुस्साए ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई. देखते ही देखते मामला झड़प तक पहुंच गया. आरोप है कि ग्रामीणों ने वन विभाग के चार वाहनों में तोड़फोड़ की और उनके शीशे तोड़ दिए.  वन विभाग के अनुसार, रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन के अंतिम चरण में भीड़ की ओर से पथराव भी किया गया, जिसमें विभाग के कई कर्मचारी घायल हुए. घायल कर्मचारियों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई. 

हाईवे जाम, पुलिस ने संभाला मोर्चा

घटना के विरोध में ग्रामीणों ने नारायणपुर-कुशालगढ़ हाईवे जाम कर दिया.सड़क पर बड़ी संख्या में लोग बैठ गए, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया. हालात बिगड़ने की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह के नेतृत्व में जिले भर से पुलिस बल मौके पर पहुंचा. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाजिम अली सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे. एसपी सतवीर सिंह और एएसपी नाजिम अली स्वयं ग्रामीणों के बीच पहुंचे और लोगों से बातचीत कर उन्हें समझाया. काफी देर तक चली वार्ता के बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया और यातायात दोबारा शुरू कराया गया. 

डिटेन की अफवाह से फिर बढ़ा तनाव

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कुछ लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेने की चर्चा फैल गई. जैसे ही यह बात ग्रामीणों तक पहुंची, भीड़ फिर से पुलिस की ओर बढ़ने लगी. हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने मौके पर ही स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को डिटेन नहीं किया गया है.  इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो गई. 

10 घंटे बाद सफल हुआ रेस्क्यू

सुबह शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन शाम तक चलता रहा. वन विभाग की टीम लगातार टाइगर की गतिविधियों पर नजर रखती रही और सही अवसर का इंतजार करती रही. करीब 10 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार टीम ने टाइगर को ट्रेंकुलाइज किया, और पूरी सावधानी के साथ सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया. इसके बाद उसे विशेष वाहन से सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया. वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि टाइगर को किसी प्रकार की चोट न पहुंचे. 

वन विभाग का आधिकारिक बयान

उप वन संरक्षक, बाघ परियोजना सरिस्का ने बताया गया कि तालवृक्ष रेंज के तुलसीवाला गांव से बाघ का रेस्क्यू अत्यंत कठिन परिस्थितियों में किया गया. पूरे दिन चले अभियान के दौरान स्थानीय सहयोग के अभाव में टीम को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. विभाग ने चेतावनी दी है कि हिंसा, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. 

फोरेस्टर मनोज नागा का बयान

फोरेस्टर मनोज नागा ने बताया कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रेस्क्यू किया गया टाइगर किस पहचान का है. प्रारंभिक संभावना है कि यह ST-12 बाघिन का दूसरा शावक हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि तकनीकी जांच और पहचान के बाद ही की जाएगी. फिलहाल टाइगर को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है. 

पुलिस ने समझाकर किया शांत 

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाजिम अली ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची थी.  एक युवक टाइगर के हमले में घायल हुआ है, जिसे उपचार के लिए रेफर किया गया है.  पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और क्षेत्र में शांति बनी हुई है. 

डर के माहौल में गांव के लोग 

घटना के बाद ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीवों के लगातार आबादी क्षेत्र में आने से लोगों में डर का माहौल है.  उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए.  ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ बैठक कर अपनी मांगें रखने की बात कही है. 

पुलिस की टीम कर रही निगरानी 

एएसपी नाजिम अली ने बताया क‍ि टाइगर के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद तुलसीवाला गांव और आसपास के क्षेत्रों में हालात सामान्य हैं.  एहतियात के तौर पर वन विभाग और पुलिस की टीमें क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए हैं.  प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई दे तो स्वयं उसके पास जाने के बजाय तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचना दें.  फिलहाल रेस्क्यू किए गए टाइगर की पहचान और उसे आगे किस वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, इस पर वन विभाग अंतिम निर्णय लेगा.